सीमांत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त कदम, एसएसबी द्वारा नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत मशरूम खेती की विधि हेतु प्रशिक्षण शिविर का किया गया आयोजन।

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सीमांत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त कदम, एसएसबी द्वारा नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत मशरूम खेती की विधि हेतु प्रशिक्षण शिविर का किया गया आयोजन।

बनबसा (चम्पावत)। मनोहर लाल, कमांडेंट के निर्देशन में 57 वाहिनी, सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक उत्थान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में ग्राम नयाबस्ती के रामलीला मैदान में मशरूम खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत एक प्रभावशाली पहल शुरू की गई तथा 03 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जशोबंता सेनापति, सहायक कमांडेंट ने की एवं कार्यक्रम के अंतर्गत वैज्ञानिक विधियों से ग्रामीणों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक और प्रभावी तकनीकों से अवगत कराया गया। जी.बी. पंत, कृषि विश्व विध्यालय के डॉक्टर जितेंद्र क्वात्रा, डॉक्टर संजय चौधरी और डॉक्टर निर्मला भट्ट जैसे विशेष वैज्ञानिक प्रशिक्षकों द्वारा विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें किसानों को मशरूम की खेती से संबंधित गहराई से जानकारी दी गई। सत्रों में मशरूम की बुवाई, उत्पादन, देखभाल, और विपणन से जुड़ी सभी तकनीकी जानकारियाँ प्रदान की गईं, ताकि ग्रामीण मशरूम उत्पादन में कुशल बन सके |

इस कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के 52 किसानों को 125 निशुल्क मशरूम के बैग साथ ही साथ ऑस्विटर मशरूम एवं अन्य सामग्री भी वितरित की गयीं, ताकि सीमांत क्षेत्र के किसान छोटे पैमाने पर मशरूम की खेती शुरू कर सकें। मशरूम उत्पादन को एक प्रभावी और लाभदायक स्वरोजगार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणो की आय में वृद्धि का साधन बनेगा। मशरूम खेती की सरल विधि, कम भूमि आवश्यकता, और अल्प निवेश के साथ अधिक लाभकारी होने के कारण यह किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी ।

श्री मनोहर लाल, कमांडेंट, 57 वाहिनी ने बताया कि मशरूम एक उच्च प्रोटीन, कम वसा वाला सुपरफूड है, जो पोषण की दृष्टि से भी अत्यधिक मूल्यवान है। इसके उत्पादन में पानी और भूमि की आवश्यकता भी बहुत कम होती है, जिससे यह सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनता है। मशरूम की खेती के जरिए ग्रामीण किसान न केवल अपनी घरेलू आय में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि इसे बाजार में बेचकर अतिरिक्त मुनाफा भी कमा सकते हैं। मशरूम के बढ़ते बाजार और इसकी बढ़ती मांग ने इसे एक आकर्षक व्यवसाय बना दिया है। एसएसबी की यह पहल न केवल सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगी । सीमांत क्षेत्र के लोगों को स्वावलंबी बनाने के इस प्रयास से ग्रामीणों में आत्मविश्वास और उत्साह की भावना भी बढ़ेगी ।

शिविर मे उपस्थित भारत, उप ग्रामप्रधान एवं ग्रामीणों ने इस सफल पहल के लिए एसएसबी और जी.बी. पंत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को विशेष धन्यवाद दिया, जिन्होंने सीमांत क्षेत्र के नागरिकों को स्वावलंबन की दिशा में एक सशक्त मार्ग प्रदान किया है। यह प्रयास निश्चित रूप से सीमांत क्षेत्रों के लिए एक नई आशा की किरण साबित होगा।

वही कार्यक्रम मे, श्री रोहित चौधरी, JE इरीगेशन, बनबसा उपस्थित रहें।वही एसएसबी के तरफ से समवाय प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार, उप निरीक्षक विकास कुमार, सहायक उप निरीक्षक राजू कुमार सिंह, अनिल कुमार, भीम सिंह नेगी, मुख्य आरक्षी कृष्णा कुमार, दिगंता रॉय, अर्जुन सिंह आरक्षी हिवाले संतोष तथा प्रदीप कुमार उपस्थित रहे।

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