बोर्ड बैठक की मांग – 26 अप्रैल के बाद नहीं बुलाई बोर्ड बैठक, आखिर किस बात का इंतज़ार? सभासदों ने ईओ को सौंपा ज्ञापन, बोले— बैठक के बिना कैसे चलेगा विकास? 

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बोर्ड बैठक की मांग – 26 अप्रैल के बाद नहीं बुलाई बोर्ड बैठक, आखिर किस बात का इंतज़ार? सभासदों ने ईओ को सौंपा ज्ञापन, बोले— बैठक के बिना कैसे चलेगा विकास?

➡️ अब तो सुन लो साहब…! बोर्ड बैठकें लोकतंत्र की औपचारिकता नहीं, शहर के विकास की सबसे बड़ी जरूरत होती हैं.

टनकपुर (चम्पावत)। नगर पालिका परिषद टनकपुर में विकास कार्यों की रफ्तार अब बोर्ड बैठको के इंतज़ार में मानों थमती नजर आ रही है। 26 अप्रैल के बाद से अब तक पालिका बोर्ड की एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई है। ऐसे में नाराज़ सभासदों ने अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की है। जिसकी एक प्रति चेयरमेन को भी प्रेषित की गयीं। सभासदों का कहना है कि बोर्ड बैठक ही वह मंच है, जहां शहर के विकास, जनहित और पालिका की योजनाओं पर चर्चा कर निर्णय लिए जाते हैं। लेकिन महीनों से बैठक न होने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अधर में लटके हैं और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

हैरानी की बात यह भी है कि पिछली बोर्ड बैठक में जिन प्रस्तावों को मंजूरी मिली थी, उनकी समीक्षा तक आज तक नहीं की गई। आखिर वे प्रस्ताव धरातल पर उतरे भी या नहीं, इस पर किसी ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। सभासदों का कहना है कि यदि नियमित बोर्ड बैठकें ही नहीं होंगी तो जनता के मुद्दे कौन उठाएगा और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कैसे होगी? जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल प्रस्ताव पारित करना नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन पर निगरानी रखना भी है।

अब सवाल यह है कि जब सभासद खुद बैठक बुलाने के लिए ज्ञापन देने को मजबूर हों, तो पालिका प्रशासन आखिर किस बात का इंतज़ार कर रहा है? क्या शहर का विकास भी फाइलों की तरह बैठक की तारीख का इंतजार करेगा?सभासदों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस बार उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द बोर्ड बैठक आयोजित करेगा, ताकि लंबित प्रस्तावों की समीक्षा हो सके और शहर के विकास कार्यों को नई गति मिल सके।

ज्ञापन मे सभासद वकील अंसारी, चर्चित शर्मा, दिनेश कुमार, सब्या बाल्मीकि, दिलदार अली, बबीता वर्मा और आशा भट्ट के हस्ताक्षर हैं।

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