कृषि निदेशालय में 6 माह की चुप्पी, आरटीआई से स्थानांतरण अधिनियम-2018 का उल्लंघन हुआ उजागर।
देहरादून/नैनीताल। उत्तराखण्ड कृषि निदेशालय में वर्ष 2025 के स्थानांतरण मामलों में उत्तराखण्ड लोक सेवकों का स्थानांतरण अधिनियम, 2018 के गंभीर उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व कृषि अधिकारी चंद्रशेखर जोशी की आरटीआई से हुआ है।
आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार कृषि निदेशालय ने स्थानांतरण से संबंधित फाइलें लगभग छह माह तक दबाकर रखीं, जबकि अधिनियम की धारा-22, 23(12) एवं 24 का पालन नहीं किया गया। वर्ष 2025 में कृषि विभाग द्वारा 23 श्रेणी-2 अधिकारियों का अनिवार्य स्थानांतरण किया गया, लेकिन धारा-23(12) के तहत निर्धारित 10 दिन की समय सीमा में केवल 12 अधिकारियों ने ही कार्यभार ग्रहण किया। शेष 11 अधिकारियों द्वारा समय सीमा उल्लंघन के बावजूद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। एक अधिकारी को केवल कागज़ों में कार्यमुक्त दिखाकर मामला समाप्त कर दिया गया, जबकि एक अधिकारी अब भी कार्यमुक्त आदेश की प्रतीक्षा में है। धारा-24 के अंतर्गत दंड और जवाबदेही की कार्रवाई पूरी तरह शून्य पाई गई।
आरटीआई आवेदक का आरोप है कि निदेशालय ने अधिनियम को कानून न मानकर विभागीय नोटशीट की तरह लिया। मामला अब सचिव कृषि से होते हुए मुख्य सचिव, राज्यपाल, कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं PMO तक पहुँच चुका है। यदि शासन ने संज्ञान लिया तो प्रकरण विभागीय जांच, जवाबदेही निर्धारण एवं दंडात्मक कार्रवाई तक पहुँच सकता है।

