टनकपुर में कूड़ा डंपिंग को लेकर टकराव, जिला पंचायत और नगर पालिका आमने-सामने, जिला पंचायत के पास अभी तक नहीं है कूड़ा डंपिंग जोन, जिला पंचायत के कूड़ा वाहन पर निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं करने की तोहमत।
टनकपुर (चम्पावत) । शहर के कूड़ा निस्तारण को लेकर चल रही व्यवस्थाएं अब विवाद का रूप लेती नजर आ रही हैं। कूड़ा डंपिंग जोन को लेकर जिला पंचायत और नगर पालिका परिषद के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। सोमवार को स्थिति उस समय और तीखी हो गई जब नगर पालिका की सहायक कनिष्ठ लिपिक अनुराधा यादव ने अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचकर जिला पंचायत के कूड़ा वाहन को डंपिंग जोन में कूड़ा डालने से रोक दिया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान वाहन की चाबी तक जब्त कर ली गई और उसे पालिका कार्यालय में जमा कराया गया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों विभागों के बीच खींचतान और तेज हो गई है।
दरअसल, नगर पालिका परिषद के लिए कूड़ा डंपिंग जोन लंबे समय से “जी का जंजाल” बना हुआ है। अव्यवस्थित ढंग से डाले जा रहे कूड़े के कारण न केवल सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालात को देखते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार स्वयं इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय हो गए हैं और डंपिंग जोन को हटाने व कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।
नगर पालिका की सहायक कनिष्ठ लिपिक अनुराधा यादव ने बताया कि जिलाधिकारी मनीष कुमार, अधिशाषी अधिकारी ऋषभ उनियाल और पालिकाध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश हैं कि डंपिंग जोन को व्यवस्थित किया जाए। इसी क्रम में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिला पंचायत का कूड़ा वाहन निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं कर रहा, जिससे अव्यवस्था उत्पन्न हो रही है। इसी कारण मजबूरन यह कार्रवाई करनी पड़ी। घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि जब एक ही क्षेत्र में दो विभाग काम कर रहे हैं, तो समन्वय की कमी क्यों है। कूड़ा प्रबंधन जैसे संवेदनशील विषय पर विभागीय टकराव कहीं न कहीं प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, निगाहें जिलाधिकारी मनीष कुमार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि शहरवासियों को अब इस कूड़ा संकट से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रहीं है।

