लोहाघाट – काली कुमाऊं की विशिष्ट अंदाज में गाई जाने वाली खड़ी होली के बोल से गूंज उठेगा सीएम आवास।

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लोहाघाट – काली कुमाऊं की विशिष्ट अंदाज में गाई जाने वाली खड़ी होली के बोल से गूंज उठेगा सीएम आवास

➡️ कोलीढेक गांव की 52 सदस्यीय महिला होलियारों का दल आज हुआ देहरादून के लिए रवाना ।

गणेश दत्त पाण्डेय – वरिष्ठ पत्रकार

लोहाघाट। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिले में विकास के साथ विरासत एवं महिलाओं के सांस्कृतिक जागरण के क्षेत्र में जो क्रांति आई है, उसकी मिसाल स्वयं मुख्यमंत्री के आवास में बृहस्पतिवार को कोलीढेक गांव की प्रसिद्ध महिला होलियारों की टीम अपना जलवा बिखेरेगी। निर्मला अधिकारी के नेतृत्व एवं अलका ढेक, कृष्णा देवी, पुष्पा देवी के संयोजन में गई 52 सदस्यीय महिला होलियारों की टीम जो पहले होली रंग महोत्सव में अपनी उपेक्षा से नाराज थी, आज उनकी नाराजगी कपूर की तरह उड़कर वह बेहद खुश मिजाज में देवाधिदेव भगवान महादेव की स्तुति में होली गीत का गायन कर उनका आशीर्वाद लेते हुए यहां से रवाना हुई, जिन्हें नगर पालिका के अध्यक्ष गोविंद वर्मा, बीडीओ अशोक अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर विदा किया।

मालूम हो कि काली कुमाऊं की खड़ी होली का अपना अलग ही अंदाज होने के कारण ही इसकी विशिष्ट शान व पहचान बनी हुई है। होलियारों की वेशभूषा एक सी होती है। उनमें छोटे-बड़े, ऊंच-नीच, गरीब-अमीर का कोई भेदभाव नहीं होता है। यहां की होली सामाजिक एकरूपता, आपसी सद्भाव की ऐसी जीवंत मिसाल है कि हर व्यक्ति होली की खुशियों से एक दूसरे को बांधकर उनमें अपनत्व का भाव भर देते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का चंपावत जिले के लोगों से बना राजनैतिक रिश्ता अब आत्मीयता से जुड़ने के बाद उनके द्वारा चूड़ी वाले हाथों को हर क्षेत्र में सशक्त करने का ऐसा प्रयास किया है कि घर की चहारदिवारी में रहने वाली आज यहां की महिलाएं अपने कलात्मक पक्ष का प्रदर्शन करने के लिए सीएम आवास में जा रही है। महिलाओं को प्रथम पंक्ति में लाने के लिए सीएम की धर्मपत्नी गीता धामी का उन्हें बड़ा सहारा मिल रहा है। महिला होलियारों का कदम से कदम, सुर-लय-ताल के साथ ब्रज भाषा में अपनी अलग गायन शैली में बनाई जाने वाली भाव भंगिमा को देहरादून के लोग देखते ही रह जाएंगे, जिसमें होली ढोल वादन में पारंगत सुनीता ढेक , रेखा ढेक, शीला फर्त्याल तथा झांझर वादन में शांति जोशी का जलवा तो अपना अलग ही रंग दिखाएगा। होलियारों का ऐसा नजारा उत्तराखंड में कहीं देखने को नहीं मिलता है।

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