चम्पावत जनपद के महर पिनाना वैष्णव शक्तिपीठ के कपाट खुलने पर डीएम को भावपूर्ण आमंत्रण, क्षेत्रवासियों में उत्साह, जिले के तेज तर्रार और मृदुभाषी जिलाधिकारी से ग्रामीणों को है बहुत अपेक्षाएं।

➡️ 01 मई को बैसाखी पूर्णिमा पर खुलेंगे कपाट, सुबह 10:30 बजे से होगा विष्णु पूजन.
चंपावत। जनपद चंपावत के प्राचीन एवं आस्था के केंद्र वैष्णव शक्तिपीठ सकल धाम महर पिनाना के कपाट खुलने के पावन अवसर पर जिला अधिकारी मनीष कुमार को भावपूर्ण आमंत्रण भेजा गया है। मंदिर समिति और क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि वे 1 मई 2026 को कपाट उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं। मंदिर समिति के अनुसार यह शक्तिपीठ जनपद का एक अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहां की परंपरा उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर संचालित होती है। यहां हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को कपाट बंद होते हैं और बैसाखी पूर्णिमा के दिन पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। इस वर्ष यह शुभ अवसर 01 मई को पड़ रहा है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।
समिति अध्यक्ष राम दत्त एवं गुरुजी चन्द्रशेखर जोशी ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि जनपद में मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं। ऐसे में यदि जिलाधिकारी इस पौराणिक धाम के कपाट खुलने के अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं तो यह क्षेत्रवासियों के लिए गर्व और आस्था का विषय होगा। पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रचार-प्रसार के अभाव में यह पवित्र स्थल अब तक व्यापक श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल रहा है, लेकिन प्रशासनिक सहयोग और मार्गदर्शन से इसे धार्मिक पर्यटन के रूप में नई पहचान मिल सकती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिलाधिकारी की सक्रिय कार्यशैली और धार्मिक स्थलों के प्रति उनकी संवेदनशीलता इस धाम के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
कार्यक्रम के तहत 01 मई को प्रातः 10:30 बजे से विष्णु पूजन आरंभ होगा, जबकि मुख्य अतिथि के आगमन का समय 11:00 से 11:30 बजे के बीच निर्धारित किया गया है। दोपहर 3:30 बजे कार्यक्रम का समापन होगा। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि जिलाधिकारी इस आमंत्रण को स्वीकार कर अपनी गरिमामयी उपस्थिति से न केवल श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाएंगे, बल्कि इस पौराणिक धाम को नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

