डोली के सहारे जिंदगी: 21वीं सदी में भी सड़क के इंतजार में बाराकोट के बंजवाड़ और खल्किना! बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को आज भी डोली में ढोने को मजबूर ग्रामीण विकास के दावों पर उठे सवाल।
बाराकोट (चम्पावत)। एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं चम्पावत जिले के बाराकोट क्षेत्र के तोक बंजवाड़ और खल्किना आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि गांव में किसी के बीमार होने, बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की नौबत आने पर ग्रामीणों को उसे डोली में बैठाकर कई किलोमीटर पैदल सड़क मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सड़क के अभाव में गांव के लोगों का जीवन कठिनाइयों से घिरा हुआ है। सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान सामने आती है, जब मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर दुर्गम रास्तों से गुजरना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान डोली में उठाकर सड़क तक पहुंचाया गया है। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब पगडंडियां फिसलन भरी और खतरनाक हो जाती हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के दशकों बाद भी बंजवाड़ और खल्किना जैसे तोक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क न होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। युवाओं का पलायन लगातार बढ़ रहा है, जबकि बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा है कि विकास के दावों को धरातल पर उतारने का समय आ गया है। उनका कहना है कि जब तक गांव सड़क से नहीं जुड़ेगा, तब तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच भी अधूरी ही रहेगी।
➡️ बड़ा सवाल………
जब देश चंद्रमा और अंतरिक्ष की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तब आखिर चम्पावत के बंजवाड़ और खल्किना के ग्रामीण कब तक डोली के सहारे जिंदगी ढोने को मजबूर रहेंगे? सड़क का यह इंतजार अब केवल विकास का नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा का भी प्रश्न बन चुका है।

