लोहाघाट – गैरसेण को स्थायी राजधानी बनाओ, सख्त भू-कानून लागू करो, यूकेडी युवा अध्यक्ष आशीष नेगी की लोहाघाट से हुंकार।
लोहाघाट। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने लोहाघाट से प्रदेश सरकार को खुली चुनौती देते हुए कई अहम मुद्दों पर निर्णायक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार गैरसेण को स्थायी राजधानी घोषित कर दे, प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू करे, मूल निवास प्रमाण पत्र की स्पष्ट व्यवस्था बनाए तथा गढ़वाली, कुमाऊनी, बोक्सा, भोटिया और जौनसारी भाषाओं के संरक्षण के लिए ठोस नीति लागू करे, तो वह राजनीति छोड़ने को तैयार हैं।
नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के मूल मुद्दों से लगातार समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गैरसेण पर्वतीय जनता की भावनाओं का प्रतीक है, लेकिन आज तक उसे स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल पाया। “आखिर कब तक पहाड़ की भावनाओं के साथ राजनीतिक खेल खेला जाएगा?” उन्होंने सवाल उठाया।
➡️ भू-कानून और मूल निवास पर जोर……
यूकेडी युवा अध्यक्ष ने प्रदेश में बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीद पर नियंत्रण के लिए सख्त भू-कानून की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि जब तक स्पष्ट मूल निवास नीति और प्रभावी भूमि कानून लागू नहीं होंगे, तब तक पहाड़ की अस्मिता सुरक्षित नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य और सांस्कृतिक संतुलन का प्रश्न है।
➡️ भाषाई अस्मिता का मुद्दा…
नेगी ने सरकार पर स्थानीय भाषाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि गढ़वाली, कुमाऊनी, बोक्सा, भोटिया और जौनसारी भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान हैं। यदि इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से कट जाएंगी।
➡️ पद्मश्री सम्मान पर उठाए सवाल…..
नेगी ने हालिया पद्मश्री सम्मान को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “जिस व्यक्ति ने कभी कहा था कि ‘उत्तराखंड बनाकर भूखे मरोगे’, उसे पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह राज्य आंदोलन के शहीदों और संघर्ष करने वालों का अपमान है।” हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान से सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
➡️ आंदोलन की चेतावनी….
आशीष नेगी ने अपने बयान को राजनीतिक स्टंट मानने से इंकार करते हुए कहा कि यह जनता की भावनाओं की आवाज है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो युवा शक्ति सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।
लोहाघाट से उठी यह राजनीतिक हुंकार अब देहरादून तक कितना असर डालती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, यूकेडी के युवा नेतृत्व ने सत्ताधारी दल के सामने एक बड़ा और स्पष्ट सवाल खड़ा कर दिया है।

