टनकपुर में सागौन का ‘सफर’ और वन विभाग की रहस्यमयी चुप्पी! आखिर माजरा क्या हैं जो विभाग जवाब देने से कतरा रहा हैं, सागोंन के लट्ठों सहित पिकअप वाहन सीज।
टनकपुर (चम्पावत)। टनकपुर शारदा रेंज में लकड़ी तस्करी का खेल आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है, यह सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग ने खुद सागौन के 6 लट्ठों से भरा एक पिकअप वाहन पकड़कर सीज किया, लेकिन जब मीडिया ने जानकारी चाही तो विभाग ने पूरे मामले पर ऐसा रहस्य का पर्दा डाल दिया मानो कोई राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला हो।
बताया जा रहा है कि टनकपुर-पूर्णागिरि मार्ग पर वन कर्मियों ने पिकअप वाहन संख्या यूके-03 सीए 0739 को रोककर जांच की। वाहन में सागौन के 6 लट्ठे लदे थे, लेकिन चालक उनके वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद वाहन और लकड़ी को सीज कर लिया गया। सवाल यह है कि जब कार्रवाई हुई है तो फिर जानकारी छिपाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है? गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले शहर क्षेत्र में जमीन में दफन कर छिपाई गई अवैध लकड़ी का मामला सामने आया था। वह मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और प्रकरण सामने आ गया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि वन संपदा पर डाका डालने वाले बेखौफ हैं और उनका नेटवर्क लगातार सक्रिय है।
सबसे दिलचस्प पहलू विभाग की चुप्पी है। आमतौर पर छोटी-छोटी बरामदगी पर प्रेस नोट जारी कर वाहवाही लूटने वाला विभाग इस बार “नो कमेंट्स” की मुद्रा में दिखाई दे रहा है। आखिर ऐसा क्या है जिसे सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है? क्या मामला सिर्फ अवैध लकड़ी का है या फिर इसके तार कहीं और तक जुड़े हैं? विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी जोरों पर है कि बरामद लकड़ी का संबंध किसी प्रभावशाली व्यक्ति व विभागीय तंत्र से हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग की असामान्य गोपनीयता इन चर्चाओं को और हवा दे रही है। ऐसे सवाल जिनके जवाब आना अहम हों जाता हैं -जब वाहन पकड़ा गया तो लकड़ी कहां से काटी गई? तस्करी में कौन-कौन शामिल है? बरामद सागौन किसकी थी और कार्यक्षेत्र किसका था ? विभाग कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने से आखिर क्यों बच रहा है? क्या बड़े नामों को बचाने की कोशिश हो रही है?
वन विभाग की ओर से सिर्फ इतना कहा गया है कि मामला हुआ हैं लेकिन उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। आखिर सवाल है कि अगर कार्रवाई सही और पारदर्शी है तो फिर सच्चाई बताने में डर कैसा? कहीं ऐसा तो नहीं कि जंगल से निकले ये 6 लट्ठे अब वन विभाग की फाइलों में जाकर “रहस्यमयी लकड़ी” बन गए हैं और सच भी उन्हीं फाइलों में दफन होने की तैयारी में है? जब तक विभाग पूरे मामले का खुलासा नहीं करता, तब तक सवाल उठते रहेंगे और चर्चाओं का बाजार गर्म रहेगा। जंगल की लकड़ी से ज्यादा भारी इस वक्त वन विभाग की चुप्पी नजर आ रही है। बता दें जंगल से सागौन के लट्ठे निकल आए, वाहन भी पकड़ लिया गया, लेकिन विभाग की जुबान पर ऐसा ताला लगा है कि मानो लकड़ी नहीं, कोई राजनैतिक रहस्य बरामद हुआ हो।” अगर सब कुछ नियमों के तहत हुआ है तो पारदर्शिता से परहेज क्यों? और यदि परहेज है, तो फिर सवाल उठना भी लाजिमी है।”

