उपलब्धि – चम्पावत जिले के खूनाबोरा की बेटी बनी राज्य हैकथान विजेता, शिक्षक प्रकाश उपाध्याय के मार्गदर्शन में पहाड़ों की समस्या दूर करने का रोडमैप किया तैयार।
➡️ कोमल विश्वकर्मा की ऐतिहासिक जीत ने तकनीकी नवाचार के नए युग का उद्घोष किया.
चंपावत। कभी यह कहा जाता था कि पहाड़ों में सिर्फ संघर्ष की कहानियाँ जन्म लेती हैं; आज पहाड़ की प्रतिभा, नवाचार और तकनीकी क्रांति का नया केंद्र बन रहे हैं। इस परिवर्तन का सबसे ताज़ा और चमकदार उदाहरण है राउमावि खूनाबोरा की कोमल विश्वकर्मा, जिन्होंने राज्य स्तरीय हैकथॉन में विजेता बनकर उत्तराखंड को गर्व से भर दिया, और यह साबित कर दिया कि भविष्य सिर्फ शहरों की प्रयोगशालाओं में नहीं, बल्कि पहाड़ के छोटे-छोटे गाँवों में भी लिखा जा रहा है। नवाचार के मंच पर कोमल प्रतिभा का नया मानक बनकर उभरी हैं। मार्गदर्शक शिक्षक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय के साथ मिलकर कोमल द्वारा प्रस्तुत ‘स्मार्ट ग्राम एवं आजीविका सशक्तिकरण मंच’ केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की नयी परिकल्पना है। यह प्लेटफॉर्म एआई, एआर और वीआर जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से ग्रामीणों को प्रशिक्षण, उत्पाद विपणन, डिजिटल कनेक्टिविटी, कौशल-विकास और वित्तीय सहायता से जोड़ने का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।
तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा, “इस प्रोजेक्ट में ग्रामीण भारत को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की वह क्षमता है, जिसकी कल्पना आने वाले दशक की नीतियों में की जा रही है।” 350 से अधिक प्रतिभागियों के बीच से उभरकर शीर्ष 4 में पहुँचना, एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। राज्यभर के 350 से अधिक प्रतिभागियों में से चरणबद्ध चयन प्रक्रिया के बाद सर्वश्रेष्ठ 20 टॉपर चुने गए। फिर नेशनल जूरी के सामने अपने आइडिया और प्रोटोटाइप का कठोर मूल्यांकन करवाने के बाद, अंतिम 4 विजेताओं में शामिल होना कोमल के लिए केवल उपलब्धि नहीं बल्कि इतिहास रचने जैसा क्षण था।
जूरी में यूपीईएस के सीईओ मोहित नागपाल, यूसैक की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा गैरोला और प्रो. सुगंधा शर्मा जैसे विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने प्रोजेक्ट को “भविष्य के स्मार्ट ग्राम मॉडल का सशक्त खाका” बताया। ख़ूनाबोरा से उभरने वाली कोमल की सफलता में मार्गदर्शक शिक्षक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय की निर्णायक भूमिका रही है। वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी और नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने वाले उपाध्याय ने न केवल इस प्रोजेक्ट को आकार दिया, बल्कि छात्रों में डिजिटल नवाचार की भावना को क्रियाशील रूप में विकसित किया। उनके अनुसार,
“यह प्रोजेक्ट केवल तकनीक का नमूना नहीं, बल्कि पहाड़ की जरूरतों और भविष्य के अवसरों का सम्मिलित समाधान है। इसे टीम के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इससे लाभान्वित हो सकें।” उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट को भविष्य में वित्तीय सहयोग भी प्राप्त होगा ताकि जमीनी क्रियान्वयन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया जा सके। विजेताओं को गो ग्रेड इंटरनेशनल द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि अगस्त्य नवम इंटरनेशनल फाउंडेशन ने प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए पूर्ण आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की है। इससे इस प्रोजेक्ट को एक मॉडल के रूप में धरातल पर उतरने का अवसर मिलेगा, जो भविष्य में राज्य के कई गाँवों के लिए प्रेरक साबित हो सकता है।
जिले की ऐतिहासिक उपलब्धि को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है। जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी, जिलाधिकारी मनीष कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने कोमल और उनके मार्गदर्शक शिक्षक को बधाई दी। इस उपलब्धि ने पहाड़ के युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि अवसर मिलने पर पहाड़ का युवा किसी भी मंच पर अपनी पहचान दर्ज करा सकता है।

