बड़ा सवाल – सात वर्षों से सफाई ठेका नवीनीकरण पर उठे सवाल, आखिर केपीएस के पालिका में कैसे जमे हैं पांव?
➡️ सात वर्षों से सफाई ठेका नवीनीकरण पर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चल रही पुरानी व्यवस्था?
🔹 9.21 लाख प्रतिमाह भुगतान, फिर भी 805 रुपये दैनिक मजदूरी की मांग अधर में
🔹 नया ठेका बना कर्मचारियों की उम्मीद, पर्यावरण मित्रों को मिल सकते हैं बेहतर अधिकार व सुविधाएं
🔹 टनकपुर पालिका में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, सात साल से क्यों नहीं हुई नई निविदा?
टनकपुर (चम्पावत)। नगर पालिका परिषद टनकपुर में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर विगत लगभग सात वर्षों से सफाई कार्य का नया ठेका क्यों नहीं किया गया और किस वजह से वर्तमान व्यवस्था लगातार जारी है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका सफाई कार्य के एवज में प्रतिमाह लगभग 9 लाख 21 हजार रुपये का भुगतान कर रही है, जबकि करीब 33 पर्यावरण मित्र विभिन्न वार्डों में सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं। बावजूद इसके कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सफाई कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से 805 रुपये प्रतिदिन मजदूरी लागू किए जाने की मांग उठाई जाती रही है, लेकिन नया ठेका न होने के कारण यह मांग फाइलों में ही उलझी हुई नजर आ रही है। कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा है कि यदि नई निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है तो उनके वेतन, सुविधाओं और श्रम अधिकारों को अधिक मजबूती मिल सकती है।
नगर में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब अधिकांश विभाग समय-समय पर निविदाओं का नवीनीकरण करते हैं, तो फिर सफाई व्यवस्था से जुड़ा ठेका वर्षों से पुराने ढर्रे पर क्यों चल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से कार्य प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, कर्मचारियों को बेहतर लाभ मिलेंगे और नगर की सफाई व्यवस्था में भी और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।
नगरवासियों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि आखिर वर्तमान व्यवस्था को लगातार बनाए रखने के पीछे क्या कारण हैं और क्या नगर पालिका भविष्य में नई निविदा जारी करने पर विचार कर रही है। फिलहाल यह विषय नगर में चर्चा और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
यदि नई निविदा प्रक्रिया शुरू होती है तो कर्मचारियों के हितों को मजबूती मिलने के साथ-साथ नगर की सफाई व्यवस्था में भी बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

