ऑफ-रोड बसों पर निगम की लापरवाही उजागर, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन, 15 दिन की मोहलत, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 20 मई से सीएम कैंप कार्यालय में आंदोलन की दी चेतावनी।

टनकपुर (चम्पावत)। टनकपुर मंडल में महीनों से ऑफ-रोड खड़ी बसों का मुद्दा अब गंभीर टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। 02 मई को वित्त नियंत्रक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर स्वीकार किया गया कि बसों को ऑफ-रोड रखने से निगम को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी है। बैठक में महाप्रबंधक (संचालन/तकनीकी/कार्मिक), उप महाप्रबंधक (तकनीकी), भवन अभियंता व संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, उप महामंत्री समेत तमाम प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में टनकपुर मंडल के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए कि तत्काल प्रभाव से बसों को ऑन-रोड किया जाए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। 04 मई को मंडलीय प्रबंधक (संचालन) द्वारा बुलाई गई वार्ता में न तो कोई ठोस कार्ययोजना सामने आई और न ही जिम्मेदारी तय करने की इच्छाशक्ति दिखी, जिससे संगठन में भारी रोष व्याप्त है।
संगठन ने साफ कहा है कि निगम की ढिलाई और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी अब बर्दाश्त के बाहर है। इसके बावजूद, प्रांत प्रबंध समिति और मुख्यालय देहरादून के निर्देशों के तहत संगठन ने फिलहाल 15 दिनों के लिए धरना स्थगित किया है, ताकि प्रशासन को आखिरी मौका दिया जा सके।
संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में ऑफ-रोड बसों को ऑन-रोड नहीं किया गया और धरने के दौरान कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई वापस नहीं ली गई, तो 20 मई से मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र स्थित कैंप कार्यालय में उग्र धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
संगठन का आरोप है कि परिवहन निगम की अव्यवस्था सीधे तौर पर सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल कर रही है। “यदि हालात नहीं सुधरे, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी,” संगठन ने स्पष्ट करते हुए कहा कि अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा।

