चम्पावत वॉइस की खबर का हुआ असर, सभासदों ने फूंका बिगुल – टनकपुर नगर पालिका परिषद में पसरा सन्नाटा, सभासदों का सवाल,अधिशासी अधिकारी को चार्ज न देने के पीछे कौन जिम्मेदार, कराई जाए बोर्ड की बैठक और साल भर के कार्यों का हो हिसाब, सौपा मांगपत्र।

➡️ “चम्पावत वॉइस” की खबर का हुआ असर, ईओ को चार्ज न देने पर सभासद हुए मुखर.
➡️ पालिका अध्यक्ष को सम्बोधित सभासदो के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में ईओ को चार्ज देने और बोर्ड बैठक कराये जाने की मांग.
➡️ नगर पालिका परिषद के प्रशासनिक ठहराव पर सभासदों ने मचाई हलचल.

टनकपुर (चम्पावत)। नगर पालिका परिषद टनकपुर में उपजे प्रशासनिक गतिरोध ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन द्वारा नियुक्त अधिशासी अधिकारी को 12 दिनों से भी अधिक का समय बीत जाने के बावजूद अब तक पदभार नहीं सौंपा गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर न तो पालिका चेयरमेन और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है।
इस मुद्दे को लेकर नगर पालिका के निर्वाचित सभासदों ने स्वयं अध्यक्ष को सम्बोधित मांग पत्र सौंपा, जिसमें प्रशासनिक चुप्पी पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। सभासदों का कहना है कि अधिशासी अधिकारी के बिना नगर पालिका का संचालन प्रभावित हो रहा है, विकास कार्य ठप पड़े हैं और जनता के जरूरी कार्य लंबित हैं, फिर भी जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं। मांग पत्र में सभासदों ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि आखिर चार्ज न देने का वास्तविक कारण क्या है? जब शासन से नियुक्ति हो चुकी है तो स्थानीय स्तर पर अड़चन कौन पैदा कर रहा है? जनता और जनप्रतिनिधियों को अब तक स्थिति से अवगत क्यों नहीं कराया गया?
सभासदों ने साथ ही यह भी कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए 09 फरवरी 2026 तक बोर्ड बैठक बुलाना अनिवार्य हो गया है। बैठक में आय-व्यय का पूरा ब्यौरा, क्रय प्रक्रिया की जानकारी, पारदर्शिता के लिए समितियों का गठन तथा विकास एवं सफाई कार्यों पर चर्चा की मांग की गई है। नगरवासियों में भी इस प्रशासनिक चुप्पी को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब चुने हुए सभासद सवाल उठा रहे हैं, तब भी यदि जवाब नहीं मिल रहा तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर पालिका चेयरमेन और प्रशासन अपनी चुप्पी तोड़कर स्थिति स्पष्ट करेंगे, या टनकपुर की जनता को यूँ ही जवाबों का इंतजार करना पड़ेगा? बताते चले ज़ब पांच सभासदों द्वारा विगत कुछ समय पहले इस्तीफा दिया गया तो उन्हें विरोधी करार दिया गया, लेकिन आज 11 सभासदो द्वारा ज़ब मनमानी के खिलाफ चेयरमेन को सम्बोधित दो पत्र दिए गए तो अब क्या सभी निर्वाचित सभासदों को विरोधी गुट का कहा जाएगा, या इनकी मांगो पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा, जो वास्तव में बड़ा सवाल हैं।
ज्ञापन में सभासद हसीब अहमद, वकील अहमद, चर्चित शर्मा, सविता विष्ट, आशा शर्मा, बबीता वर्मा, वर्षा शर्मा, सब्या बाल्मीकि, दिलदार अली, शैलेन्द्र सिंह और दिनेश कुमार के हस्ताक्षर हैं।


