हौसला – संघर्ष की मिट्टी से उगी सफलता: बड़ी बहन निशा बनी परिवार की ताकत, वन आरक्षी बन बदली किस्मत, गरीबी, जिम्मेदारियों और अभावों से जंग, गुरु के मार्गदर्शन और बहन के त्याग ने पूरे परिवार को दिलाई नई पहचान।

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हौसला – संघर्ष की मिट्टी से उगी सफलता: बड़ी बहन निशा बनी परिवार की ताकत, वन आरक्षी बन बदली किस्मत, गरीबी, जिम्मेदारियों और अभावों से जंग, गुरु के मार्गदर्शन और बहन के त्याग ने पूरे परिवार को दिलाई नई पहचान।

लोहाघाट। कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और सही दिशा मिल जाए तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है। लोहाघाट क्षेत्र के रेगडूं स्थित छंदा गांव की रहने वाली निशा ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। नरेश सिंह और हेमा देवी की बड़ी बेटी निशा ने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा लीं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते उसने न सिर्फ खुद संघर्ष किया, बल्कि अपने छोटे भाई-बहनों के लिए भी प्रेरणा बन गई। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी। इसी संघर्ष के दौर में उसकी मुलाकात रायकोट महर निवासी महेंद्र महर के माध्यम से युवा मार्गदर्शक संजय देव से हुई। यह मुलाकात निशा के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। संजय देव ने बिना किसी शुल्क के उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई और हर कदम पर मार्गदर्शन दिया।निशा की मेहनत और संजय देव के मार्गदर्शन का परिणाम यह रहा कि उसका चयन यूकेएसएसएससी परीक्षा के तहत वन आरक्षी पद पर हो गया। यह उपलब्धि सिर्फ निशा की नहीं, बल्कि पूरे परिवार के संघर्ष की जीत बन गई।

संजय देव ने यहीं रुककर नहीं, बल्कि निशा के भाइयों अंकित और करण को भी मार्गदर्शन दिया। परिणामस्वरूप अंकित का चयन कनिष्ठ सहायक और करण का चयन पुलिस आरक्षी पद पर हुआ। वहीं सबसे छोटी बहन नीतू अब उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी है। निशा और उसके भाई-बहन अपने माता-पिता के साथ-साथ संजय देव को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। उनका कहना है कि माता-पिता ने उन्हें जीवन दिया, लेकिन सही दिशा और मुकाम तक पहुंचाने का काम संजय सर ने किया।

वहीं संजय देव इसे अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि ईश्वर की प्रेरणा मानते हैं। उनका कहना है कि जरूरतमंद और प्रतिभाशाली युवाओं की मदद करना ही उनका उद्देश्य है। उन्होंने अब तक सैकड़ों युवाओं को निःशुल्क मार्गदर्शन देकर उनके जीवन को नई दिशा दी है। संजय देव ने यह भी कहा कि प्रदेश में पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं आयोजित होने के कारण अब गरीब और मेहनती युवाओं को भी उनका हक मिल रहा है। निशा की यह प्रेरणादायक कहानी महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक मूल्यों और सही मार्गदर्शन की ताकत का जीता-जागता उदाहरण है जो यह संदेश देती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मुश्किल मंजिल की राह नहीं रोक सकती।

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