जिलाधिकारी मनीष कुमार की पहल लाई रंग, मेला मजिस्ट्रेट बने डॉ. ललित मोहन तिवारी, व्यवस्थाओं को देंगे नई दिशा, माँ पूर्णागिरि मेला चढ़ेगा चरम पर, प्रशासनिक तैयारियों में नई ऊर्जा।

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जिलाधिकारी मनीष कुमार की पहल लाई रंग, मेला मजिस्ट्रेट बने डॉ. ललित मोहन तिवारी, व्यवस्थाओं को देंगे नई दिशा, माँ पूर्णागिरि मेला चढ़ेगा चरम पर, प्रशासनिक तैयारियों में नई ऊर्जा।

चम्पावत/ टनकपुर । माँ पूर्णागिरि मेला अब अपने पूरे यौवन की ओर बढ़ रहा है। आगामी एक दो दिनों में श्रद्धालुओं की भारी आमद के साथ मेला चरम पर पहुंचने की उम्मीद है। इस बार मेले को सुव्यवस्थित और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार के प्रयास साफ तौर पर रंग लाते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने मेला मजिस्ट्रेट के रूप में मुनस्यारी के तेजतर्रार और कर्मठ उपजिलाधिकारी डॉ. ललित मोहन तिवारी की तैनाती की है। डॉ. तिवारी अपनी कार्यशैली, सख्त अनुशासन और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे मेले के संचालन को न सिर्फ सुचारू बनाएंगे, बल्कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित करेंगे।

डॉ. तिवारी मेले के दौरान व्यवस्थाओं का सूक्ष्म अध्ययन करेंगे। खास बात यह है कि वे मुख्यमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप पूर्णागिरि मंदिर क्षेत्र को वर्षभर संचालित होने वाले तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में स्थायी सुविधाओं का खाका भी तैयार करेंगे। इसके लिए वे तीर्थयात्रियों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों और सुझावों को समझेंगे।

साथ ही, प्रशासन की योजना है कि पूर्णागिरि आने वाले श्रद्धालुओं को आसपास के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की ओर भी आकर्षित किया जाए। इनमें सूखीढांग, चंपावत, लोहाघाट, पिथौरागढ़, हाट कालिका मंदिर, मुनस्यारी, अद्वैत आश्रम मायावती, मीठे रीठे के प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्रीरीठासाहिब, फटक शिला मंदिर, बाराही धाम देवीधुरा जैसे स्थलों को जोड़ते हुए एक धार्मिक-पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। ईमानदार छवि और कड़क कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. तिवारी मेले में अव्यवस्थाओं और हेराफेरी पर भी सख्ती से नजर रखेंगे। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली विस्तृत रिपोर्ट भविष्य में स्थायी व्यवस्थाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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