वन विकास निगम रजत जयंती समारोह का हुआ भव्य आयोजन, मुख्यमंत्री ने कुमाऊँ में उत्तराखण्ड वन विकास निगम के कार्यालय भवन की स्थापना की करी घोषणा ।
देहरादून / टनकपुर। उत्तराखण्ड वन विकास निगम की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सतत वन प्रबंधन, डिजिटल नवाचार एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों का गौरवशाली उत्सव मुख्यमंत्री आवास में मुख्य सेवक सदन में बुधवार को ‘वन विकास निगम रजत जयंती समारोह, 2026’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान वन विकास निगम द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों जैसे उत्तराखण्ड वन विकास निगम हस्तपुस्तिका एवं उपखनिज हेतु वन भूमि हस्तांतरण मागदर्शिका का विमोचन किया गया। साथ ही निगम की उपलब्धियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया तथा प्रकाष्ठ नीलामी की प्रक्रिया को अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनाने हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘हिमकाष्ठ’ मोबाईल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने कहा कि उत्तराखण्ड वन विकास निगम ने विगत 25 वर्षों में राज्य के वन संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने निगम द्वारा अपनाई गई डिजिटल तकनीकों एवं पारदर्शी नीलामी प्रणाली की सराहना करते हुए इसे एक आदर्श मॉडल बताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखण्ड की समृद्ध वानस्पतिक विविधता के दृष्टिगत वन क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। वानिकी की दृष्टि से मधुमक्खी की परागण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा कुमाऊँ क्षेत्र में उत्तराखण्ड वन विकास निगम के कार्यालय भवन की स्थापना की घोषणा भी की गयी। कार्यक्रम में राज्य सभा सांसद नवीन बंसल; विधायक कैंट सविता कपूर; विधायक लालकुआँ डॉ0 मोहन सिंह बिष्ट; विधायक कपकोट सुरेश गढ़िया तथा विधायक रानीखेत प्रमोद नैनवाल उपस्थित रहे।
समारोह में प्रमुख सचिव, वन आर0के0 सुधांशु तथा उत्तराखण्ड वन विकास निगम की प्रबंध निदेशक श्रीमती नीना ग्रेवाल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) रंजन कुमार मिश्र, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल, वन सचिव सी0 रविशंकर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
इस अवसर पर वन विकास निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक; वन विकास निगम एवं वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी सहभागिता की। साथ ही वन विकास निगम के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न हितधारक, क्रेता, ढुलानकर्ता आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में कहा कि निगम ने सतत वन प्रबंधन, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं तथा भविष्य में कृषि वानिकी एवं इकोटूरिज्म जैसे क्षेत्रों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। प्रमुख सचिव, वन श्री आर0के0 सुधांशु ने निगम की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं के माध्यम से निगम ने सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
प्रबंध निदेशक नीना ग्रेवाल ने कहा है कि निगम ने विगत 25 वर्षों में निरंतर प्रगति करते हुए एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर सार्वजनिक उपक्रम के रूप में स्वयं को स्थापित किया है। लॉगिंग कार्यों में जहाँ प्रारंभिक वर्षों में औसतन 1-1.25 लाख घनमीटर प्रकाष्ठ का उत्पादन होता था वहीं वर्तमान में यह बढ़कर लगभग 2.5 लाख घनमीटर प्रतिवर्ष तक पहुँच गया है। पिछले तीन वर्षों यथा वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में लॉगिंग उत्पादन क्रमशः 2.65 लाख घनमीटर, 2.46 लाख घनमीटर एवं 1.98 लाख घनमीटर रहा है। खनन कार्यों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2001 में जहाँ उपखनिज चुगान की मात्रा 24.74 लाख घनमीटर थी, वहीं वर्ष 2026 में यह बढ़कर लगभग 84 लाख घनमीटर हो गई है। निगम द्वारा राजस्व अर्जन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। विगत तीन वर्षों यथा 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में निगम द्वारा क्रमशः ₹112 करोड़, ₹163 करोड़ एवं ₹167 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया। वहीं वर्ष 2024-25 में निगम द्वारा प्रकाष्ठ विक्रय से लगभग ₹627 करोड़ तथा खनन कार्यों से ₹158 करोड़ का व्यवसाय किया गया। जो निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किये गये कठोर परिश्रम का प्रतिफल है।
निगम द्वारा ई-ऑक्शन प्रणाली जैसे यूवीएमएस तथा केएमएस सॉफ्टवेयर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यों को पारदर्शी एवं दक्ष बनाया गया है। वहीं ‘हिमकाश्ठ’ मोबाईल एप्लिेकश देशभर के क्रेताओं को प्रकाष्ठ की ई-नीलामी हेतु एक खुला एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। निगम द्वारा कृषि वानिकी, जड़ी-बूटी संग्रहण एवं वनोत्पादों के विपणन, इकोटूरिज्म तथा ग्रामीण आजीविका संवर्धन के माध्यम से राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। इस अवसर पर निगम के समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ के कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को भी सम्मानित किया गया। जिन्होंने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

