घोर लापरवाही – टनकपुर शहरी क्षेत्र धूल प्रदूषण की चपेट में, नागरिकों की सेहत पर बढ़ता खतरा, नगर पालिका परिषद और कार्यदायी संस्था मौन, पानी छिड़काव व धूल नियंत्रण की नहीं हैं कोई व्यवस्था।

➡️ सड़कों की खुदाई से पूरे क्षेत्र में उड़ रही धूल.
➡️ घरों और दुकानों में जम रही धूल की परतें.
सांस संबंधी बीमारियों का बढ़ता खतरा.
➡️ हाल ही में बनी सड़कें तोड़े जाने से सार्वजनिक धन की बर्बादी पर सवाल.
➡️ पानी छिड़काव व धूल नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं.
➡️ नगर पालिका परिषद की चुप्पी से नागरिकों में नाराजगी.

टनकपुर (चम्पावत)। टनकपुर का शहरी आबादी क्षेत्र इन दिनों विकास नहीं, बल्कि धूल के गुबार में जी रहा हैं हालात ऐसे हैं कि घर हो या दुकान हर जगह धूल की परते जम चुकी हैं। सुबह दरवाजा खोलते ही मानों रेगिस्तान का सामना हो रहा हैं। लोगों के फेफड़े जवाब देने लगे हैं और सांस सम्बन्धी संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलने की संभावनाएं बलबती हो रहीं हैं।नगर के शहरी आबादी क्षेत्र में इन दिनों धूल प्रदूषण गंभीर समस्या बनता जा रहा है। पेयजल लाइन बिछाने के कार्य के दौरान सड़कों की खुदाई किए जाने से मार्गों पर मिट्टी फैल गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में लगातार धूल उड़ रही है। इसका सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार घरों और दुकानों में धूल की परतें जम रही हैं तथा सांस संबंधी बीमारियों और संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों एवं पहले से बीमार व्यक्तियों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सड़कों को पेयजल लाइन खुदाई कार्य के कारण तोड़ दिया गया, जिससे निर्माण कार्य की योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि पेयजल लाइन डाले जाने का कार्य प्रस्तावित था, तो सड़कों का निर्माण उसके बाद किया जाना चाहिए था, जिससे सार्वजनिक धन की बचत के साथ-साथ असुविधा से भी बचा जा सकता था। इसके अतिरिक्त, खुदाई के बाद धूल नियंत्रण के लिए पानी छिड़काव या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। वर्तमान में नगर के कई मार्गों पर आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। इस पूरे प्रकरण में नगर पालिका परिषद की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान या समाधान सामने नहीं आया है, जिससे नागरिकों में असंतोष व्याप्त है। लोग मांग कर रहे हैं कि संबंधित विभाग शीघ्र ही धूल नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराए तथा भविष्य में कार्यों के बेहतर समन्वय की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
अब आवश्यकता इस बात की है कि नगर प्रशासन जनहित को प्राथमिकता देते हुए योजनाबद्ध एवं समयबद्ध कार्रवाई करे, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके और सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो। फिलहाल वर्तमान में नगरीय क्षेत्र के लोग धूल में सांस लेने को मजबूर हैं।

