मुख्यमंत्री की विधानसभा में वीआईपी कवरेज के नाम पर पत्रकारों का होता आ रहा हैं तिरस्कार, वीआईपी पास के बावजूद कवरेज के नाम पर अपमान, चंपावत पत्रकार संगठन ने दिया सख्त संदेश – तिरस्कार अब नहीं होगा बर्दाश्त !

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मुख्यमंत्री की विधानसभा में वीआईपी कवरेज के नाम पर पत्रकारों का होता आ रहा हैं तिरस्कार, वीआईपी पास के बावजूद कवरेज के नाम पर अपमान, चंपावत पत्रकार संगठन ने दिया सख्त संदेश – तिरस्कार अब नहीं होगा बर्दाश्त !

➡️ मीडिया गैलरी सिर्फ नाम को, बैठते हैं पार्टी के नेता, कवरेज में होती हैं दुश्वारी.

➡️ वीआईपी कार्यक्रमों में हायर की गयीं न्यूज़ एजेंसी का रहता हैं बोलबाला, स्थानीय पत्रकारों की रहती हैं भीड़ से भी बदतर हालत.

➡️ सरकारी बैठकों में भी प्रेस प्रतिनिधियों की शोभा बढ़ाते हैं विभागीय अधिकारी, पत्रकारों को निभाना पड़ता हैं संतरी का दायित्व.

➡️ बुजुर्ग कलमकारों को उठानी पड़ती हैं सबसे ज्यादा तकलीफ, जहाँ कवरेज बन जाती हैं सजा.

चंपावत। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सम्मान देने की बातें मंचों से खूब होती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जब मुख्यमंत्री जैसे वीआईपी कार्यक्रमों की कवरेज की बात आती है तो पत्रकारों को “अतिथि” नहीं बल्कि “अवांछित” समझ लिया जाता है। ऐसा ही तीखा आक्रोश चंपावत जिला पत्रकार संगठन की वर्चुअल बैठक में देखने को मिला, जहां पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि सूचना विभाग द्वारा पास जारी होने के बावजूद कार्यक्रम स्थलों पर पत्रकारों को अपमानजनक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

पत्रकारों का कहना है कि कई बार व्यवस्थाएं इतनी “शानदार” होती हैं कि पत्रकार न तो सही जगह खड़े हो पाते हैं, न कैमरा उठा पाते हैं और न ही अपनी आपत्ति दर्ज करा पाते हैं। यानी कवरेज के नाम पर केवल “खामोश मौजूदगी” की अनुमति दी जाती है।

सम्मानजनक व्यवस्था की मांग, डीएम की मौजूदगी में होगी वार्ता……

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब इस व्यवस्था को “चलने दो” नहीं कहा जाएगा। स्थायी समाधान के लिए जिलाधिकारी की उपस्थिति में जिला सूचना अधिकारी से वार्ता कर पत्रकारों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

जिला अध्यक्ष चंद्रबलभ ओली ने बैठक का शुभारंभ करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं और प्रशासन तथा जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पत्रकारों की गरिमा की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है, कोई विकल्प नहीं।

परिचय पत्र नवीनीकरण और मान्यता पर भी चर्चा……

बैठक में संगठन द्वारा जारी परिचय पत्रों के नवीनीकरण पर चर्चा की गई। इसके लिए आधार कार्ड, शैक्षिक प्रमाण पत्र, संस्थान का अधिकृत पत्र, मोबाइल नंबर, ब्लड ग्रुप और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करना अनिवार्य होगा। पत्रकार मान्यता के विषय पर भी विचार हुआ और तय मापदंडों के अंतर्गत आने वाले पत्रकारों से आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा गया।इसके अलावा लंबे समय से कार्यरत पत्रकार अपने मेडिकल वाउचर संलग्न कर मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र संगठन के माध्यम से भेज सकेंगे।

तहसील स्तर पर इकाइयों का गठन, होली मिलन कार्यक्रम का प्रस्ताव…..

जिला महामंत्री गिरीश बिष्ट ने बताया कि संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तहसील स्तर पर इकाइयों का गठन किया जाएगा।मुख्यमंत्री के नोडल अधिकारी के साथ पत्रकारों का होली मिलन कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। कुछ पत्रकारों ने सुझाव दिया कि यदि मुख्यमंत्री की उपस्थिति हो जाए तो आयोजन को नई गरिमा मिलेगी।

वरिष्ठ पत्रकारों सहित बड़ी संख्या में सहभागिता…….

बैठक में वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडे, देवेंद्र देवा, कुंदन सिंह बिष्ट, महेंद्र सिंह बिष्ट, नवीन भट्ट, बाबूलाल यादव, विनोद जोशी, दीपक धामी, भूपेश प्रजापति सहित अनेक पत्रकारों ने चर्चा में भाग लिया। अंत में सभी पत्रकारों ने संगठन को मजबूत और एकजुट बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पत्रकार सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक संघर्ष जारी रहेगा।

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