बड़ी कार्यवाही – स्कूली बसों पर परिवहन विभाग का शिकंजा, दो दिन मे 28 चालान एक वाहन जब्त, स्कूलों की बड़ी लापरवाहियां आयी सामने, चेकिंग से मचा हड़कंप…।

➡️ “बच्चों की सुरक्षा कागज़ों में पास, सड़कों पर फेल!”
टनकपुर /बनबसा (चम्पावत)। स्कूल बसें बच्चों को सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने का दावा करती हैं, लेकिन हकीकत में कई बसें खुद ही “असुरक्षित सफर” का चलता-फिरता उदाहरण बन चुकी हैं। एआरटीओ मनोज बगोरिया के नेतृत्व में परिवहन विभाग की सख्ती ने इस सच्चाई पर से पर्दा उठा है। महज दो दिन में 28 चालान और एक वाहन जब्त,ये आंकड़े ही बता रहे हैं कि “नियम” अब तक सिर्फ कागज़ों की शोभा बढ़ा रहे थे।

परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जांच में सामने आया कि जिन बसों में बच्चों को रोज़ाना भरोसे के साथ बैठाया जाता है, उनमें परमिट अधूरे, फिटनेस गायब, टैक्स बकाया, प्रदूषण प्रमाणपत्र संदिग्ध और सुरक्षा इंतज़ाम नाममात्र के हैं। आपातकालीन द्वार सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं, सीसीटीवी कैमरे या तो बंद हैं या लगे ही नहीं, और ऊपर से ओवरलोडिंग जैसे बच्चों की सुरक्षा नहीं, “जुगाड़” प्राथमिकता हो। चालक और अटेंडर की यूनिफॉर्म भी कई जगह “वैकल्पिक” नजर आई, मानो जिम्मेदारी भी वैकल्पिक हो गई हो।

एआरटीओ मनोज बगोरिया ने साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ये अभियान आगे भी जारी रहेगा।

➡️ सबसे बड़ा सवाल…
जब स्कूलों में “सुरक्षा” पर भाषण दिए जाते हैं, तब सड़कों पर वही सुरक्षा नियमों की धूल फांकती नजर आती है। सवाल ये नहीं कि 28 चालान क्यों हुए…सवाल ये है कि अब तक ये लापरवाही बिना चालान के कैसे चलती रही? क्या ज़ब चालान होंगे तब व्यवस्थाएं सुधरेंगी, क्या छात्र छात्राओं की सुरक्षा बगैर चालानी कार्यवाही के यूँ ही चलती रहेगी। जो बड़ा सवाल हैं..?
दो दिवसीय चेकिंग अभियान मे एआरटीओ मनोज बगोरिया, टीएसआई आनन्द सिंह बिष्ट, का. किशन आर्या, नीरज कुमार, महेन्द्र रस्तोगी आदि मौजूद रहे।

