विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर वन विभाग के बूम वन कार्यालय सूखीढांग में गोष्ठी व पौध रोपण कार्यक्रम का किया गया आयोजन।
सूखीढांग (चम्पावत)। शनिवार को प्रभागीय वनाधिकारी/उप प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में बूम वन कार्यालय परिसर सूखीढांग में अनुभाग अधिकारी की अध्यक्षता में विश्व वानिकी दिवस की थीम वन और अर्थव्यवस्थाएँ अन्तर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान जौल, विभागीय कर्मचारीगण, वन पंचायत सरपंच झालाकुड़ी व सूखीढांग एवं ग्रामीणजनों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में वनों के संरक्षण एवं संर्वधन, वन एवं वन्यजीव सुरक्षा, मानववन्यजीव संघर्ष, वनाग्नि रोकथाम, जल संरक्षण, वृक्षा रोपण आदि कार्यों के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा की गई। वनों के संरक्षण में स्थानीय सहभागिता पर जोर दिया गया। वनाग्निकाल में वनों की सुरक्षा हेतु संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की समाप्ति परिसर में पौध रोपण कर की गयीं।
इस दौरान प्रेमा बोहरा ग्राम प्रधान जौल, गिरीश चंद्र जोशी वन दरोगा,श्याम सिंह सरपंच वन पंचायत झालाकुड़ी, ममता देवी सरपंच वन पंचायत सूखीढांग, किशोर बोहरा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जौल, लालमणी जोशी वन दरोगा, राजेन्द्र कुमार वन बीट अधिकारी, गौरव भट्ट, जगदीश चन्द्र जोशी, धर्मानन्द जोशी, महिपाल सिंह, लाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद, गोपाल सिंह नेगी, धर्मवीर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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छीनीगोठ – विश्व वानिकी दिवस पर वन संरक्षण का संदेश, ग्रामीणों ने लिया हरित भविष्य का संकल्प।

चंपावत। दोगाड़ी वन क्षेत्र अंतर्गत छीनी चौकी परिसर में शनिवार को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व वनक्षेत्राधिकारी द्वारा किया गया, जिसमें पी.एल.वी. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंपावत एवं स्थानीय ग्रामीणजन सक्रिय रूप से शामिल हुए। इस वर्ष की थीम “फॉरेस्ट & इकॉनमी” के अनुरूप वनों के आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर वनों के महत्व, उपयोग, संरक्षण एवं संवर्द्धन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं। ग्रामीणों को जागरूक करते हुए वनाग्नि की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त की गई तथा क्षणिक लाभ के लिए जंगलों में आग न लगाने की अपील की गई। साथ ही वनाग्नि से वन संपदा एवं वन्य जीवों को होने वाले नुकसान और दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया तथा सभी से वनाग्नि रोकथाम में सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई।
इसके अतिरिक्त ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से जंगलों में न जाने, हिंसक वन्य जीवों से बचाव हेतु सावधानियां बरतने और मानव-वन्य जीव संघर्ष को रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई। जल, जंगल और जमीन के महत्व को रेखांकित करते हुए जल संरक्षण, सहअस्तित्व और सतत विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में चिपको आंदोलन जैसे प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से ग्रामीणों को वन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वन केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जगत के अस्तित्व का आधार हैं, और इनके संरक्षण व संवर्द्धन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के द्वारा ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव जागृत करने का प्रयास किया गया।
इस दौरान धीरज कुमार जोशी वन क्षेत्राधिकारी, चंद्रशेखर सकलानी उप वन क्षेत्राधिकारी, बसंती देवी वन रक्षक, पीएलवी अजय गुरुरानी, सोनी थापा, सोनीजहाँ, हेमलता गड़कोटी, राधिका अधिकारी, किरन गहतोड़ी, सुमन चौहान, रवि कुमार, अजय अधिकारी, जीवन कुमार, मो जुबैर, मो उमर, विशन सिंह, हरीश राम, कुलवंत सिंह, गोविन्द राम, किशन चंद, अब्दुल रहीम, मीर बीबी, आलिया, बसंती देवी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

