पाटी – आस्था, सौन्दर्य, चमत्कार और तीर्थ स्थल का पवित्र संगम है “श्री बालेश्वर धाम” गोलाना सेरी, तमाम असुविधाओं के बावजूद आस्था के चलते प्रतिवर्ष शीश नवाने पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु ।

➡️ रामेश्वरम से भी प्राचीन है भगवान शिव का यह धाम, जहाँ तमाम असुविधाओं के बाद भी प्रतिवर्ष पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु.
लोहाघाट। चंपावत जिले के पाटी विकास खंड के गोलाना सेरी स्थित “बालेश्वर धाम” न केवल प्राचीन देवस्थल है अपितु हजारों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और शिव आराधना का प्रमुख केंद्र भी है। यहां पर भगवान शिव की पूजा अर्चना शिव के रौद्र रूप में होती है। शिव का रौद्र रूप, जिसे रुद्र भी कहते हैं, उनका उग्र, विनाशकारी और शक्तिशाली रूप है, जो आतंक और अन्याय के सामने प्रकट होता है। यह प्रकृति के क्रूर पहलुओं का प्रतीक है, जो विनाशकारी ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है। यहां पर भगवान शिव पंच प्रेतों (भूत, पिशाच, कूष्मांड, ब्रह्मराक्षस, तथा बेताल) के आसन में विराजमान हैं। वर्ष 1995 से पूजा कर रहे पुजारी आनंद भट्ट बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने बताया है इस मंदिर का संबंध त्रेतायुग से है। रामेश्वरम की स्थापना भी त्रेतायुग में ही हुई थी और इस रौद्र रूपी शिव धाम का इतिहास रामेश्वरम से तीन वर्ष पूर्व का माना जाता है। प्राचीन समय में मुख्य मंदिर के अतिरिक्त मंदिर परिसर में 22 अन्य मंदिर थे, जिनमें भगवान सूर्य का मंदिर भी शामिल था, लेकिन 8वीं सदी की अतिवर्षा एवं विनाशकारी जल प्रलय में अधिकांश मंदिरों का समूह क्षतिग्रस्त हो गए परन्तु उनके अवशेष आज भी मौजूद हैं। मुगल आक्रांताओं ने भी इस मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया और मुख्य की शिवलिंग पर किए गए प्रहार के निशान आज भी मौजूद हैं। लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हो सके, लेकिन वे इस मंदिर के सोने का छत्र ले गए।
बताते हैं वर्ष 1140 से पहले स्थानीय पुजारियों का 22 परिवार हुआ करता था, बाद में उनके वंश वृद्धि न होने के कारण नेपाल के राजा कांचन देव नृपति ने अपने शासनकाल में काशी से बंगज वंश के ब्राह्मण भट्ट परिवार को यहां बतौर पुजारी के रूप में लाए थे तब से आज तक उनके ही वंशज पुजारी हैं और आज भी उनके 22 ही परिवार हैं। सन 1245 में राजा विक्रम चंद ने इन पुजारियों को भूमि और मंदिर दान में दे दिया था और वर्ष 1962 तक दान में दी गई भूमि का लगान के रूप में जमा पैसे ही इन पुजारियों को दिया जाता रहा।
इस पवित्र धाम में प्रतिवर्ष कार्तिक, सावन, वैशाख, माघ में शिवार्चन, शिव पुराण जैसी विशेष पूजा अर्चना होती रहती है और अन्य 8 महीने भैरव की पूजा होती है। मंदिर के आसपास आठ श्मशान स्थल हैं जिसमें क्षेत्र के करीब 40 हजार लोग अंत्येष्टि के लिए यहीं आते हैं। वर्ष की संक्रांतियों, तिथियों और नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग तीर्थ स्थल के रूप में स्नान करते हैं। भगवान शिव को भोग में उड़द और एक किलो चावल का भात, चारों पूर्णिमा और संक्रांति में खीर, माघ माह में घी और गुड तथा नवरात्र में नैवेद्य का भोग लगता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि प्रति वर्ष 10 हजार लोग आते हैं और इतने बड़े धाम और लोगों की आस्था के केंद्र को सरकार मंदिर माला में शामिल करे जिससे श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना, अनुष्ठान, ठहरने की समुचित व्यवस्था हो सके।
मंदिर का घाटी क्षेत्र में होने से यात्रियों की सुरक्षा, सुख सुविधा और बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या की देखते हुए मंदिर का विस्तार करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। श्रद्धालुओं से मिलने वाला दानादि से प्रतिदिन खाने पीने, पुजारी का रहन सहन, बागवानी, सफाई और नित्य की पूजन सामग्री में ही खर्च हो जाता है। सरकार इस ओर गंभीरता से विचार करे। पुजारी सनातन परंपराओं के जानकार वेदाचार्य प्रकाश पाण्डेय इस प्राचीन शिव मंदिर के बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, मैंने बतौर पुरोहित कई शिव मंदिरों में पूजा अर्चना की हैं लेकिन जो अलौकिक शक्ति का अनुभव मुझे यहां पर हुआ है वह अन्यत्र नहीं हुआ। मैंने कई बार अनुष्ठान करते समय भगवान शिवलिंग पर नाग को लिपटे हुए प्रत्यक्ष देखा है। लोगों की मन्नत पूरी होंने पर देश के विभिन्न स्थानों से आने वाले श्रद्धालु इस धाम के चमत्कारों को बताते हैं उनकी व्याख्या नहीं की जा सकती है। यह केवल आत्म चिंतन का विषय है। इसके वर्णन बद्रीदत्त जोशी की पुस्तक कुमाऊं का इतिहास, मानस खंड, एवं पवित्र यजुर्वेद में भी मिलता है।
पर्यटन और धार्मिक मान्यताओं को समेटे श्री बालेश्वर धाम बगैर प्रचार प्रसार के बावजूद भी हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। यही भगवान शिव की शक्ति है। तमाम पौराणिक रहस्यों को समेटे इन धरोहरों को सहेजने की आवश्यकता है जिससे कि यह धार्मिक और पर्यटन मानचित्र में आ सके। स्थानीय नंदू पाण्डेय के अनुसार यह कुमाऊं ही नहीं 12 ज्योतिर्लिंगो में एक रामेश्वरम से भी प्राचीन धाम है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और यह शिव धाम अकेले पाटी ब्लॉक के 50 हजार लोगों की आस्था, पूजा और आराध्य देव की स्थली है। यदि सरकार इस धार्मिक स्थल को मंदिर माला मिशन में शामिल कर विकसित करती है तो इससे पर्यटन तीर्थाटन तो बढ़ेगा ही अपितु स्थानीय लोग को रोजगार भी मिलेगा।


