शारदा रेंज में मानव–वन्य जीव संघर्ष रोकथाम एवं वनाग्नि सुरक्षा हेतु VVPF/ नेचर गाइडों के प्रशिक्षण का सफल आयोजन।

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शारदा रेंज में मानव–वन्य जीव संघर्ष रोकथाम एवं वनाग्नि सुरक्षा हेतु VVPF/ नेचर गाइडों के प्रशिक्षण का सफल आयोजन।

टनकपुर (चम्पावत)। शारदा रेंज के अंतर्गत स्थित रिसेप्शन सेंटर ककराली में मानव–वन्य जीव संघर्ष रोकथाम एवं वनाग्नि सुरक्षा विषय पर एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में स्थानीय वी0वी0पी0एफ0 (voluntary Village Protection Force) के सदस्यों एवं नेचर गाइडों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर कार्यरत कार्मिकों को तकनीकी, व्यवहारिक एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने हेतु सक्षम बनाना था, ताकि मानव–वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके तथा वनाग्नि जैसी आपदाओं पर प्रारंभिक स्तर पर ही प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों एवं वन अधिकारियों द्वारा प्रतिभागियों को वन्य जीवों के व्यवहार, उनके आवागमन के पैटर्न, तथा संघर्ष की संभावित परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षित उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार समय पर सूचना, त्वरित प्रतिक्रिया एवं विभागीय समन्वय से गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है। वनाग्नि प्रबंधन के अंतर्गत प्रतिभागियों को आग लगने के प्रमुख कारणों, जैसे मानवजनित लापरवाही एवं प्राकृतिक कारणों, के बारे में जागरूक किया गया। फायर लाइन निर्माण, आग बुझाने की प्रारंभिक तकनीकें जैसे फायर बीटिंग, काउंटर फायर, तथा उपलब्ध उपकरणों—फायर बीटर, ब्लोअर, पानी के टैंक आदि—का प्रभावी उपयोग भी व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है। इस हेतु प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान चलाने, ग्रामीणों को सतर्क करने तथा बच्चों एवं युवाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा, मानव–वन्य जीव संघर्ष को कम करने तथा वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का संकल्प लिया गया। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर एक सशक्त एवं प्रशिक्षित संरक्षण तंत्र विकसित किया जा सके

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