हिमालयी राज्य उत्तराखंड की भौगोलिक सच्चाइयों से इतर पेश किया गया केंद्र सरकार का बजट, राज्य के लोगों को मिली निराशा।

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हिमालयी राज्य उत्तराखंड की भौगोलिक सच्चाइयों से इतर पेश किया गया केंद्र सरकार का बजट, राज्य के लोगों को मिली निराशा।

देहरादून / बनबसा। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश सचिव कांग्रेस कमेटी उत्तराखंड आनंद सिंह मेहरा ने कहा कि यह बजट उत्तराखंड जैसे हिमालयी, सीमांत और आपदा-संवेदनशील राज्य की वास्तविक ज़रूरतों को समझने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कोई सामान्य राज्य नहीं है। यह राज्य भौगोलिक रूप से अत्यंत कठिन, पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद बजट में राज्य के लिए कोई अलग, ठोस और लक्षित विशेष प्रावधान दिखाई नहीं देता, जो गहरी निराशा का विषय है।

प्रदेश सचिव आनंद सिंह मेहरा ने कहा कि उत्तराखंड का 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पर्वतीय है, जहाँ: सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक है। हर वर्ष बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने जैसी आपदाएँ जन-जीवन और राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचाती हैं।सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे राज्य के लिए बजट में विशेष आपदा राहत पैकेज, स्थायी पुनर्वास नीति और जलवायु-अनुकूल विकास मॉडल की आवश्यकता थी, जो इस बजट में पूरी तरह नदारद है।

उन्होंने कहा कि राज्य आज गंभीर पलायन संकट से गुजर रहा है, लेकिन बजट में पहाड़  के लिए स्थायी और स्थानीय रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। कौशल विकास को स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, कृषि और भूगोल से जोड़ने का कोई ठोस खाका नहीं

MSME और पर्यटन को लेकर घोषणाएँ तो हैं, लेकिन राज्य-विशेष वित्तीय प्रतिबद्धता का अभाव है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी कृषि की समस्याएँ मैदानी कृषि से बिल्कुल अलग हैं। इसके बावजूद बजट में:पारंपरिक खेती, मोटे अनाज, जड़ी-बूटी, पशुपालन और बागवानी के लिए उत्तराखंड-विशेष नीति का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल समानता नहीं, बल्कि न्यायसंगत और संतुलित विकास की बात करता है।हिमालयी राज्यों को उनकी भौगोलिक और प्राकृतिक चुनौतियों के कारण विशेष सहायता देना कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि बजट 2026-27 में उत्तराखंड को एक बार फिर सामान्य राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया गया, जबकि इसकी चुनौतियाँ असाधारण हैं।

प्रदेश सचिव कांग्रेस कमेटी उत्तराखंड आनंद सिंह मेहरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विपक्ष के तौर पर सरकार से यह मांग करती है कि उत्तराखंड के लिए विशेष हिमालयी राज्य पैकेज घोषित किया जाए, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास हेतु स्थायी केंद्रीय फंड का गठन किया जाए। पहाड़ के युवाओं के लिए राज्य-विशेष रोजगार नीति लाई जाए, सीमांत किसानों और पहाड़ी कृषि के लिए अलग बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किए जाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी सरकार से टकराव नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हक़ की संवैधानिक और लोकतांत्रिक माँग कर रही है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं,बल्कि जवाबदेही की बुनियाद है।

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