पवित्र शारदा नदी हो रही है मैली – टनकपुर के घसियारा मंडी का गंदा नाला बना शारदा नदी के लिए अभिशाप, आस्था से हो रहा खिलवाड़, प्रशासन की चुप्पी से लोग नाराज।

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पवित्र शारदा नदी हो रही है मैली – टनकपुर के घसियारा मंडी का गंदा नाला बना शारदा नदी के लिए अभिशाप, आस्था से हो रहा खिलवाड़, प्रशासन की चुप्पी से लोग नाराज।

टनकपुर (चम्पावत)। टनकपुर के बोहरा गोठ, नया गोठ और घसियारा मंडी क्षेत्र से निकल रहा गंदा नाला शारदा नदी की पवित्रता पर खुला हमला बन चुका है। रोज़ाना सीवर, टायलेट बाथरूम से निकलकर दुर्गन्ध युक्त और प्रदूषित पानी सीधे शारदा में समा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर पर्यावरणीय अपराध पर नगरपालिका सहित जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन साधे हुए है। सबसे महत्वपूर्ण है कि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महत्वाकांक्षी शारदा कॉरिडोर योजना प्रस्तावित है, लेकिन सम्बंधित विभाग करोड़ों रूपये की लागत से बनने वाली इस योजना को पलीता लगाने का काम कर रहे है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों और मौखिक चेतावनियों के बावजूद न तो नाले की दिशा बदली गई और न ही किसी तरह की शोधन व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि जिस शारदा नदी को लोग माँ के रूप में पूजते हैं, उसी नदी को गटर में तब्दील किया जा रहा है।क्षेत्रवासियों में इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मजबूरन जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि शारदा नदी की पवित्रता से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि एक ओर सरकार गंगा-शारदा स्वच्छता की बात करती है, दूसरी ओर नगर पालिका की उदासीनता से खुलेआम गंदगी नदी में समाई जा रही है। यह स्थिति न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण कानूनों की भी धज्जियां उड़ा रही है।क्षेत्रीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल गंदे नाले को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, और शारदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस योजना लागू की जाए। लोगों का साफ कहना है, अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो मजबूरन हमें आंदोलन के लिए बाध्य होना पडेगा।

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