बड़ी खबर – आम जनता को गैस न मिलने की खबर दिखाने का खामियाजा, पत्रकार के खिलाफ हुआ मुकदमा दर्ज।

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बड़ी खबर – आम जनता को गैस न मिलने की खबर दिखाने का खामियाजा, पत्रकार के खिलाफ हुआ मुकदमा दर्ज।

➡️ बिना जांच पड़ताल के आनन-फानन में पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किये जाने की जानकारी आ रहीं हैं सामने.

➡️ रसोई गैस की किल्लत की वीडियो खबर दिखाने पर भाजपा नेता ने पत्रकार के खिलाफ सौपी तहरीर.

खटीमा। जन सरोकारों से जुड़ी खबर दिखाना अब जोखिम भरा काम होता जा रहा है। ताजा मामला खटीमा से सामने आया है, जहां गैस की किल्लत पर खबर प्रसारित करना एक वरिष्ठ पत्रकार को भारी पड़ गया। आरोप है कि खबर से नाराज एक भाजपा नेता ने पत्रकार के खिलाफ खटीमा थाने में तहरीर सौंप दी, और पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के ही आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चकरपुर भाजपा मंडल महामंत्री कमलदीप सिंह राणा की तहरीर पर खटीमा पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। भाजपा नेता कमलदीप सिंह राणा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि पत्रकार दीपक फुलेरा ने एलपीजी गैस की कमी दिखाकर भाजपा सरकार की छवि को धूमिल करने तथा आम जनता को भ्रमित करने का काम किया है, जबकि इस संकट की स्थिति में भी लगातार लोगों को गैस मिल रही है। भाजपा नेता ने सरकार की छवि धूमिल करने व भ्रामक खबर चलाने का आरोप लगाकर पत्रकार व उनके सोशल मीडिया चैनल के खिलाफ कार्यवाही की मांग की, जिस पर पुलिस ने धारा 353(1)(बी) बीएनएस में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा द्वारा बीते बुधवार को आम जनता को गैस न मिलने की ग्राउंड खबर कवर की गयीं थी । चकरपुर में गैस को लेकर बुधवार को गैस उपभोक्ताओं की काफी भीड़ लगी थी तथा लंबी लाइन में उपभोक्ता खड़े थे और गैस के इंतजार में सुबह से ही काफी परेशान थे। वहीं धरातल की वास्तविक खबर दिखाने पर भाजपा नेता की तहरीर पर पुलिस ने बिना जांच पड़ताल व पूछताछ के पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, जो न्यायोचित नहीं है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के द्वारा धरातल की हकीकत दिखाने पर बिना जांच पड़ताल के तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया जाना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। अगर इसी तरह से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के खिलाफ झूठा और फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का सिलसिला जारी रहा तो पत्रकार जनहित की खबरों और जनता से जुड़े सरोकारों को कैसे उठाएंगे यह एक गंभीर और विचारणीय प्रश्न है। इस मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों में भारी आक्रोश है। वहीं एसएसपी अजय गणपति ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है।

इधर वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा ने दो टूक कहा कि वे जनहित की खबरों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि “सच दिखाना अगर जुर्म है, तो यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। फर्जी मुकदमों से डरकर कलम नहीं रुकेगी।” स्थानीय पत्रकारों में इस कार्रवाई को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के मुकदमा दर्ज करना न केवल न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता पर भी सीधा प्रहार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में निष्पक्षता दिखाता है या फिर “खबरों की सच्चाई” ही कठघरे में खड़ी होती रहेगी। फिलहाल, एक बार फिर वही पुराना सवाल गूंज रहा है-“सच लिखना गुनाह है या सच से डरना?” जो एक बार फिर बड़ा सवाल बनता जा रहा हैं।

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