पहाड़ से पटरियों तक:- बच्चों की पहली रेल यात्रा, शिक्षा का जीवंत पाठ, शिक्षक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय की मुहिम।

खबर शेयर करें -

पहाड़ से पटरियों तक:- बच्चों की पहली रेल यात्रा, शिक्षा का जीवंत पाठ, शिक्षक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय की मुहिम।

चम्पावत। पहाड़ की शांत वादियों में पले-बढ़े बच्चों के लिए वह दिन किसी सपने से कम नहीं था। जीवन में पहली बार उन्होंने रेलवे स्टेशन की हलचल देखी, इंजन की गूंजती सीटी, पटरियों पर सरकते डिब्बे और यात्रियों की चहल-पहल। यह सब उनके लिए किताबों के पन्नों से बाहर निकलकर जीवन को करीब से समझने का अवसर था। बच्चों की आंखों में चमक और चेहरों पर उत्साह साफ बता रहा था कि यह यात्रा उनके मन में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है।

इस रेल यात्रा ने बच्चों को सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंचाया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि ऐसे अनुभव बच्चों की कल्पनाशीलता को विस्तार देते हैं और उन्हें दुनिया को समझने का नया नजरिया देते हैं। जब बच्चा स्वयं देखकर, सुनकर और महसूस कर सीखता है, तो वह ज्ञान स्थायी बन जाता है।

शैलेश मटियानी राज्य उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय पिछले कई वर्षों से बच्चों को शिक्षा के ऐसे ही जीवंत अनुभव दे रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल कक्षा और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। रेल यात्रा, संग्रहालय भ्रमण और सामाजिक संपर्क जैसे अनुभव बच्चों को जीवन से जोड़ते हैं और उन्हें व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं।

चंपावत से निकली यह टीम किसी प्रतियोगिता में भाग लेने भर नहीं जा रही, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि संवेदनशील और अनुभव आधारित शिक्षा ही सशक्त समाज की नींव है। जब शिक्षक बच्चों के सपनों को पंख देते हैं, तो वे केवल बेहतर विद्यार्थी नहीं, बल्कि जिम्मेदार, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक बनकर उभरते हैं।

यह रेल यात्रा महज सफर नहीं थी, बल्कि पहाड़ के बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और नए सपनों की पटरी बिछाने वाला एक यादगार अध्याय बन गई।

ADVERTISEMENTS
Breaking News

You cannot copy content of this page