चर्चे ही चर्चे – ये कैसा महिला सशक्तिकरण, कैसा नारी सम्मान? टनकपुर नगर पालिका में 12 दिन बाद भी अधिशासी अधिकारी चार्ज से बाहर!

टनकपुर (चम्पावत)। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और नारी सम्मान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नज़र आ रही है। टनकपुर नगर पालिका परिषद इसका ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण बन चुकी है, जहाँ एक महिला अधिशासी अधिकारी को स्थानांतरण के 12 दिन बीत जाने के बाद भी चार्ज नहीं मिल पाया है।

उल्लेखनीय हैं कि 20 जनवरी को नवागत महिला अधिशासी अधिकारी का हल्द्वानी से टनकपुर स्थानांतरण किया गया, लेकिन आज 01 फरवरी तक न तो उन्हें विधिवत चार्ज सौंपा गया और न ही इस देरी को लेकर स्थानीय प्रशासन या जिला प्रशासन कोई ठोस जवाब दे पा रहा है। सवाल ये है कि आखिर चार्ज रोके जाने के पीछे कौन-सी अदृश्य ताकत काम कर रही है?
अधिशासी अधिकारी के बिना नगर पालिका के तमाम आवश्यक कार्य बुरी तरह प्रभावित हैं। विकास कार्य ठप, फाइलें अटकी, आम जनता भटकने को मजबूर, बावजूद इसके जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि बगैर ईओ के नगर पालिका आखिर चला कौन रहा है?स्थानीय स्तर पर लोग इसे सीधे-सीधे चेयरमेन की तानाशाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक उदासीनता का नाम दे रहे हैं। लेकिन सच्चाई चाहे जो हो, इसका खामियाजा आम नागरिक भुगत रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि टनकपुर मुख्यमंत्री की विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में अगर यहीं महिला अधिकारी को इस तरह नजरअंदाज़ किया जा रहा है, तो यह न सिर्फ शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मुख्यमंत्री की शाख पर भी अनावश्यक बट्टा लगाने का काम कर रहा है। क्या यही है महिला सशक्तिकरण? क्या यही है नारी सम्मान? और क्या नियम-कानून अब व्यक्तियों की इच्छा के अधीन हो गए हैं? लेकिन सबसे बड़ा सवालआम जनता के रुके हुए कार्यों का जवाब कौन देगा? और आखिर कब मिलेगा महिला अधिशासी अधिकारी को उनका वैधानिक चार्ज? टनकपुर इस जवाब का इंतज़ार कर रहा है…।
वहीं दूसरी ओर बताया जा रहा हैं कि अधिकांश सभासद एक बार फिर लामबंद होने लगे हैं, सूत्रों की माने तो सोमवार को सभासद एक नयी इबारत लिखने की तैयारी में हैं, क्या होगा फ़रवरी के पहले सोमवार को नगर पालिका में ये फिलहाल काली रात के साये में छुपा हुआ हैं, सोमवार को उगने वाला सूरज कौन सा नया पैगाम लाएगा, ये कहना अतिश्योक्ति होंगी। अलबत्ता ईओ का 12 दिन में भी चार्ज न होना आम जनता से लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।


