जून की तपती धूप में तीर्थ यात्रियों व राहगीरो को शीतल पेय पिलाकर स्थानीय लोग कर रहे हैं पुनीत कार्य, लेकिन प्रदूषण का नहीं रख पा रहे हैं ध्यान।

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जून की तपती धूप में तीर्थ यात्रियों व राहगीरो को शीतल पेय पिलाकर स्थानीय लोग कर रहे हैं पुनीत कार्य, लेकिन प्रदूषण का नहीं रख पा रहे हैं ध्यान।

टनकपुर (चम्पावत)। इन दिनों उत्तर भारत के विश्व विख्यात माँ श्री पूर्णागिरि मेले की सरकारी अवधि समापन के मुहाने पर हैं। लेकिन तीर्थयात्रियों के आने का क्रम लगातार जारी हैं। जून के महीने में मानों आसमान से आग बरस रही हैं, लेकिन भीषण गर्मी पर आस्था भारी पड़ रही हैं। वही माँ के दरबार में आने वाले भक्तों और राहगीरो को राहत देने के उद्देश्य से स्थानीय लोगो और सामाजिक संगठनों द्वारा शीतल पेय पिलाने का पुनीत कार्य किया जा रहा हैं। अलग अलग चौराहों, सड़को में शर्बत पिलाने के कार्य को पूरी शिद्दत के साथ अंजाम दिया जा रहा हैं। लेकिन शीतल पेय के काउंटर हटने के बाद सड़को में फैले प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास वातावरण को दूषित, और स्वच्छता व्यवस्था की धज्जिया उड़ाते प्रतीत होते हैं। जिसका सामाजिक संगठन यदि ध्यान रखें हैं तो पुनीत कार्य के साथ ही सफाई व्यस्था पर्यावरण संरक्षण तीनो कार्यों को अंजाम दिया जा सकता हैं।

दीपा देवी – अध्यक्ष, माँ पूर्णागिरि पर्यावरण संरक्षण समिति टनकपुर

इस सम्बन्ध में माँ पूर्णागिरि पर्यावरण संरक्षण समिति की अध्यक्ष दीपा देवी ने कहा तीर्थयात्रियों व राहगीरो के लिए शर्बत आदि के स्टॉल लगाया जाना बेहद ही पुनीत कार्य हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखना और प्लास्टिक का उपयोग न किया जाना भी हमारा नागरिक दायित्व हैं। उन्होंने कहा अगर शीतल पेय को प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास की जगह कागज के गिलास में दिया जाए और शीतल पेय के स्टॉल के समीप डस्टबिन या पालिका के कूड़ा वाहन की मदद ली जाये तो पर्यावरण संरक्षण में खासी मदद मिलेगी। उन्होंने सामाजिक संगठनों से कागज़ के गिलास और डस्टबिन का उपयोग किये जाने की अपील की हैं। जिससे साफ सफाई तो रहेगी ही वही पर्यावरण दूषित भी नहीं होगा।

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