आस्था, शक्ति और श्रद्धा का महासंगम: माँ पूर्णागिरी धाम, जहाँ लगता हैं उत्तराखंड का सबसे लम्बे समय तक चलने वाला मेला, तमाम लोगों की होती हैं मनोकामनाऐं पूरी।

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आस्था, शक्ति और श्रद्धा का महासंगम: माँ पूर्णागिरी धाम, जहाँ लगता हैं उत्तराखंड का सबसे लम्बे समय तक चलने वाला मेला, तमाम लोगों की होती हैं मनोकामनाऐं पूरी।

टनकपुर। उत्तराखंड के चम्पावत जनपद में स्थित माँ पूर्णागिरी धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और शक्ति का प्रतीक है। नेपाल सीमा से सटे टनकपुर क्षेत्र के समीप, समुद्र तल से लगभग 3000 फीट की ऊँचाई पर विराजमान यह धाम हर वर्ष लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

➡️ पौराणिक मान्यता और दिव्य कथा –

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माँ पूर्णागिरी धाम 108 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि जब माता सती ने अपने प्राण त्यागे थे, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे। उसी दौरान माता का नाभि अंग यहाँ अन्नपूर्णा पर्वत पर गिरा, जिससे यह स्थान माँ पूर्णागिरी शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

कहा जाता है कि सच्चे मन से माँ के दरबार में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यही कारण है कि श्रद्धालु माँ को “मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी” मानते हैं।

➡️ चैत्र नवरात्रि: जब उमड़ता है आस्था का सैलाब-

हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के अवसर पर माँ पूर्णागिरी धाम में आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ता है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान सहित नेपाल से भी श्रद्धालु पैदल, दंडवत और जयकारों के साथ माँ के दर्शन को पहुँचते हैं। “जय माँ पूर्णागिरी” के गगनभेदी उद्घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। रात-दिन चलने वाली आरती, भजन और माता की चौकी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

➡️ शारदीय नवरात्र व नववर्ष में भी हजारों भक्त नवाते हैं शीश –

होली के ठीक बाद से शुरू होने वाला माँ पूर्णागिरी का मेला जहाँ तीन महीनों तक चलता हैं वहीं चैत्र नवरात्र में पूरे देश से भक्त माँ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचने हैं। वहीं नववर्ष की पूर्व संध्या पर हजारों भक्त शक्तिपीठ में पहुंचकर वर्ष भर के लिए आशीर्वाद मांग कर नए साल की शुरुआत करते हैं। हालांकि राज्य सरकार इस धार्मिक मेले को वर्ष भर चलाने के लिए प्रयासरत हैं।

➡️ प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति-

पूर्णागिरी धाम की यात्रा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर अनुभव भी है। हरे-भरे पहाड़, घुमावदार रास्ते, शांत वातावरण और ऊपर से दिखता टनकपुर का मनोरम दृश्य मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है। यहाँ पहुँचते ही मानो हर भक्त अपनी सांसारिक चिंताओं को पीछे छोड़ देता है।

➡️ श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं-

प्रशासन, पुलिस, स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग मिलकर हर वर्ष मेले को सुव्यवस्थित बनाने में जुटे रहते हैं। स्वास्थ्य शिविर, पेयजल, सुरक्षा, यातायात और सफाई की व्यवस्थाएँ श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से की जाती हैं।

➡️ आस्था जो जोड़ती है जन-जन को-

माँ पूर्णागिरी धाम जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे जाकर सभी को एक सूत्र में बांधता है। यहाँ हर कोई केवल माँ का भक्त होता है।

➡️ निष्कर्ष-

माँ पूर्णागिरी धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि श्रद्धा की शक्ति, विश्वास की जीत और आस्था का उत्सव है। जो भी भक्त एक बार माँ के दरबार में शीश नवाता है, वह बार-बार लौटने को विवश हो जाता है। माँ के दर्शनों के बाद भक्त नेपाल स्थित ब्रह्मदेव व महेन्द्रनगर में सिद्धबाबा के दर्शनों को जाते हैं, मान्यता हैं कि सिद्धबाबा के दर्शनों के बाद ही माँ पूर्णागिरी धाम की यात्रा सम्पूर्ण मानी जाती हैं।

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