टनकपुर में रेलवे का तानाशाही भरा फरमान, “सात दिन में घर खाली करो-नहीं तो उजाड़ दिए जाएंगे सैकड़ों परिवार” स्थानीय लोगों में हड़कंप, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन।
➡️ वार्ड सभासद दिलदार के नेतृत्व में सीएम, डीएम व एसडीएम को भेजा ज्ञापन.
➡️ वार्ड के तमाम लोग पहुंचे मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय, बचाव की लगायी गुहार.
टनकपुर (चम्पावत)। टनकपुर नगर के वार्ड नंबर 3 में रेलवे विभाग की कथित तानाशाही और मनमानी के खिलाफ जनआक्रोश फूटने लगा है। रेलवे विभाग द्वारा अतिक्रमण के नाम पर एक बार फिर नोटिस चस्पा कर स्थानीय लोगों को सात दिन के भीतर अपने घर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने सड़क पर आ जाने का खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय जनता का आरोप है कि रेलवे विभाग कानून, न्याय और मानवता- तीनों को ताक पर रखकर कार्रवाई कर रहा है। जिस मामले पर माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में सुनवाई लंबित है, उसी मामले में रेलवे विभाग द्वारा बार-बार नोटिस जारी कर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है। इसे जनता खुली न्यायिक अवहेलना और मानसिक उत्पीड़न बता रही है।
वार्डवासियों का कहना है कि रेलवे विभाग शासन-प्रशासन से अनुमति कहीं और की लेता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कहीं और करने पर आमादा है। यह सीधा-सीधा गरीबों को उजाड़ने की साजिश है। वर्षों से बसे परिवार, जिनकी पूरी जिंदगी की कमाई इन घरों में लगी है, आज एक नोटिस के दम पर बेघर किए जा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब मामला कोर्ट में है, तो रेलवे किस कानून के तहत बुलडोजर चलाने की धमकी दे रहा है? क्या गरीबों का घर उजाड़ना ही विकास है?
वार्ड नंबर 3 के लोगों ने एक सुर में चेतावनी दी है कि यदि रेलवे की यह जबरन कार्रवाई तत्काल नहीं रोकी गई, तो टनकपुर में बड़ा जन आंदोलन खड़ा होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।समस्त वार्डवासियों ने मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि यदि जनता को न्याय नहीं मिला, तो वे सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने को मजबूर होंगे। फिलहाल रेलवे के नोटिस से टनकपुर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हर घर में डर, गुस्सा और आक्रोश हैं, और जनता अब चुप रहने के मूड में दिखाई नहीं दें रही हैं ।

