देवदूत बना रोडवेज चालक: 34 यात्रियों की जिंदगी बचाने के लिए दे दी अपनी जान, ब्रेक फेल होने पर खाई की बजाय पहाड़ से भिड़ा दी बस, चालक बेनीराम की शहादत पर नम हुईं हजारों आंखें।

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देवदूत बना रोडवेज चालक: 34 यात्रियों की जिंदगी बचाने के लिए दे दी अपनी जान, ब्रेक फेल होने पर खाई की बजाय पहाड़ से भिड़ा दी बस, चालक बेनीराम की शहादत पर नम हुईं हजारों आंखें।

➡️ खटारा बसों के संचालन पर उठे सवाल, परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर फूटा जनाक्रोश.

लोहाघाट (चम्पावत)। कभी-कभी कुछ लोग अपने कर्तव्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का धर्म मान लेते हैं। मंगलवार को लोहाघाट-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर घटित एक दर्दनाक हादसे ने ऐसे ही एक कर्मयोगी चालक की कहानी लिख दी, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना 34 यात्रियों को नया जीवन दे दिया।

टनकपुर डिपो की रोडवेज बस संख्या UK07PA-3122 रोज की तरह यात्रियों को लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। बस में बैठे लोग अपने-अपने सफर में व्यस्त थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में मौत उनके इतने करीब पहुंच जाएगी। जैसे ही बस मरोड़खान क्षेत्र के एमजे होटल के समीप ढलान वाले हिस्से में पहुंची, अचानक उसके ब्रेक जवाब दे गए। तेज ढलान पर अनियंत्रित होती बस रफ्तार पकड़ने लगी और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

लेकिन उस भयावह क्षण में चालक बेनीराम ने घबराने के बजाय अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्हें मालूम था कि यदि बस खाई की ओर बढ़ी तो दर्जनों परिवारों के घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ जाएंगे। एक पल में उन्होंने फैसला लिया और बस को खाई की दिशा में जाने देने के बजाय सड़क किनारे पहाड़ी की मजबूत दीवार की ओर मोड़ दिया।

अगले ही क्षण जोरदार धमाके के साथ बस पहाड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्टीयरिंग संभाल रहे चालक बेनीराम झटके से बाहर जा गिरे और दुर्भाग्यवश बस के अगले पहिए की चपेट में आ गए। यात्रियों की सांसें बच गईं, लेकिन उन्हें बचाने वाला उनका संरक्षक हमेशा के लिए खामोश हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि चालक ने यह निर्णय नहीं लिया होता तो बस सैकड़ों फीट गहरी खाई में समा सकती थी और एक बड़ा जनहानि का हादसा सामने आ सकता था। बस में सवार सभी 34 यात्री सुरक्षित हैं, लेकिन हर यात्री की आंखों में अपने जीवनदाता चालक को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।

हादसे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अशोक कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। जेसीबी मशीन की सहायता से क्षतिग्रस्त बस को हटाकर चालक के शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व विधायक पूरन फर्त्याल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता, जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे। सभी ने चालक बेनीराम के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए उन्हें सच्चा नायक बताया।

➡️ खटारा बस बनी हादसे की वजह, परिवहन निगम कटघरे में…

इस हादसे ने एक बार फिर परिवहन निगम की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त बस काफी पुरानी और ओवर-माइलेज वाहन थी। बस की हालत जर्जर थी और उसके कई हिस्से अस्थायी जुगाड़ के सहारे चलाए जा रहे थे। नियमित रखरखाव और तकनीकी जांच की कमी को भी हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस की समय रहते सही मरम्मत और तकनीकी परीक्षण किया गया होता तो शायद आज एक परिवार अपना बेटा, पति और पिता न खोता। यात्रियों ने परिवहन निगम की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

➡️ एक सवाल जो जवाब मांग रहा है…

आज 34 परिवार अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने की राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन बेनीराम का परिवार अपने उस सदस्य को खो चुका है जिसने दूसरों के घरों की खुशियां बचाने के लिए स्वयं का जीवन न्योछावर कर दिया। यह केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस और बलिदान की ऐसी मिसाल है जिसे चम्पावत और उत्तराखंड लंबे समय तक याद रखेंगे। चालक बेनीराम भले ही इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन 34 जिंदगियों में उनकी बहादुरी हमेशा जीवित रहेगी।

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